किरण बेदी और अरविंद केजरीवाल को अपने आंदोलन से जोड़ना मेरे जीवन की भूल थी : अन्ना हजारे

191711-180237-hazare-1

बेलगावी (कर्नाटक) ;

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी को अपने आंदोलन से जोड़ने उनकी थी. अन्ना ने कहा कि उन्होंने अपनी इस भूल से सबक लिया है. अन्ना हजारे ने शुक्रवार को कहा कि लोकपाल, लोकायुक्त और चुनावी सुधार से संबंधित ‘समुचित’ विधेयक को पारित करने की उनकी मांग पूरी नहीं होने पर वह 23 मार्च से दिल्ली में अनशन करेंगे. हजारे ने कहा कि इस बार इच्छित परिणाम प्राप्त होने तक वह ‘आर-या-पार’ की लड़ाई लड़ेंगे. उन्होंने कहा कि उनको इस बात की उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजनीतिक व्यवस्था में परिवर्तन लाएंगे और देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने लोकायुक्त और लोकपाल विधेयकों को कमजोर कर दिया. हजारे ने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी लोकपाल विधेयक को ‘कमजोर’ किया .

एक सवाल के जवाब में सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि किरण बेदी और अरविंद केजरीवाल जैसे लोगों को अपने आंदोलन से जोड़ना उनके जीवन की भूल थी. उन्होंने कहा कि अतीत से सबक लेते हुए उन्होंने इस बार भ्रष्टाचार के खिलाफ उनसे जुड़ने वाले लोगों से 100 रुपये के स्टांप पेपर पर यह बांड भरवाया है कि वे किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ेंगे. उन्होंने कहा कि इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ वह मामला दर्ज कराएंगे.

इससे पहले 5 दिंसबर को सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा कि राजनीतिक दल और उनके नेता देश के लिए सर्वाधिक खतरनाक हैं. मध्य प्रदेश की पर्यटन नगरी, खजुराहो में दिवसीय जल सम्मेलन में हिस्सा लेने आए अन्ना ने कहा था कि देश में सच्चा लोकतंत्र नहीं है, और उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाया. अन्ना ने एक सवाल के जवाब में कहा, “देश में भ्रष्टाचार कौन कर रहा है, वे लोग जो सदन के भीतर समूह (पार्टी) में हैं और उन्हीं का समूह बाहर है. टूजी घोटाला हो, कोयला घोटाला, हेलीकॉप्टर घोटाला या व्यापमं घोटाला, इन सब में इसी समूह के लोग शामिल हैं. यह समूह गांव-गांव तक पहुंच गया है और विकास प्रभावित हो रहा है.”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार संसद में प्रवेश करते समय सीढ़ियों पर माथा टेका था और कहा था कि वह सदन में चर्चा को प्राथमिकता देंगे. अन्ना ने मोदी के इस कथ्य पर तंज कसा, और कहा, “मोदी ने सदन में जाते हुए माथा टेक कर जो कहा था, उस पर अमल किया क्या? सदन में चर्चा को प्राथमिकता देने की बात कही थी, चर्चा हो रही है क्या, लोकपाल विधेयक में संशोधन को महज तीन दिन में पारित कर लिया गया. इस संशोधन पर दोनों सदनों में से किसी में भी चर्चा नहीं हुई. यह कैसा लोकतंत्र है.”

अन्ना ने कहा, “इस देश के लोगों ने 1857 से 1947 तक 90 सालों तक अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी, इस देश में लोकतंत्र लाने के लिए, मगर ये राजनीतिक दल और नेता लोकतंत्र को आने ही नहीं दे रहे हैं. सच्चा लोकतंत्र तो तब आएगा, जब आम व्यक्ति चुनाव जीतकर लोकसभा और राज्यसभा में पहुंचेगा.” अन्ना ने आगे कहा, “अपने-अपने दलों को मजबूत करना राजनीतिक दलों की प्राथमिकता हो गई है, उनके लिए सत्ता और उससे पैसा तथा पैसे से सत्ता हथियाना ही लक्ष्य है. उनके लिए देश और समाज का कोई स्थान नहीं है. भ्रष्टाचार, गुंडागर्दी, जातिवाद का जहर यही लोग तो फैला रहे हैं, इनके खिलाफ जब कोई बोलता है, तो उस पर सब मिलकर टूट पड़ते हैं.

loading...