कौन सा अनोखा फैसला लिया एक मैच में 1009 रन बनाने वाले प्रणव धनावड़े ने?

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मुंबई ;

आप ऐसे बहुत से लोगों को जानते होंगे जिन्होंने अपने जीवन में कोई बहुत ही असाधारण काम किया हो और उन्हें ईनाम मिला हो. लेकिन वही काम और ईनाम उनकी जी का जंजाल बन जाए ऐसा शायद ही कहीं होता है. लेकिन यह हुआ. मुंबई का प्रणव धनावड़े डेढ़ साल पहले देश भर की सुर्खियों में छा गया था जब उसने इंटर स्कूल मैच में 1009 रन बनाए थे. उस समय 15 साल के प्रणव ने  जिसने किसी भी फॉर्मेट की एक पारी में 1000 रन बनाने के 117 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ा था.

यह रिकॉर्ड अभी भी कायम है. उसके इसी रिकॉर्ड को देखते हुए मुंबई क्रिकेट असोसिएशन (एमसीए) ने उसे पांच साल तक 10,000 रुपये वार्षिक स्कॉलरशिप देना की घोषणा की थी.

इसके बाद जैसे सब कुछ मुश्किल सा हो गया. उस उपलब्धि के बाद प्रणव उम्मीदों के मुताबिक नहीं खेल सका. मिडडे की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रणव और उसके कोच मोबिन शेख पर प्रदर्शन का इतना दबाव आ गया कि अब कोच प्रणव के दिमाग से उस उपलब्धि की पूरी यादें मिटाना देना चाहते हैं.

इस बीच लोगों के ताने आने लगे जिसका नकारात्मक असर भी प्रणव पर पड़ा, लोग इस तरह की बातें करने लगे कि अब प्रणव को कुछ करने की जरूरत नहीं है, उसने 1009 रन बना कर काफी पैसा कमा लिया है तो अब उसे क्रिकेट खेलने की जरूरत नहीं है.

रिकॉर्ड के बाद प्रणव को एयर इंडिया और दादर यूनियन की ओर से खेलने का मौका मिला लेकिन अब उसे दूसरी टीम से खेलने के लिए कह दिया गया है. न ही उसका मुंबई अंडर 19 टीम के संभावितों में चयन हो सका.

इन्हीं सब बातों को देखते हुए प्रणव के पिता प्रशांत धनावड़े और कोच ने मिलकर फैसला लिया कि प्रणव को अपनी उस उपलब्धि और उसकी यादों के साथ साथ स्कॉलरशिप को ही भूल जाना चाहिए और उन्होंने मुंबई क्रिकेट असोसिएशन (एमसीए) से आग्रह किया है कि उसे दी जा रही वार्षिक स्कॉलरशिप को अब बंद कर दिया जाए. कोच शेख का कहना है कि प्रणव उस धमाकेदार पारी के बाद उम्मीदों के अनुरूप नहीं खेल सका है, जिसके कारण वह दबाव महसूस कर रहा है. अब हम उसे बतौर क्रिकेटर और बेहतर बनाने के लिए नए सिरे से मेहनत करेंगे. यानि अब प्रणव अपनी नई पारी शून्य और नए सिरे से करना चाहता है. जैसा कि उसने अपने पिता और कोच के फैसले का पूरी तरह सपोर्ट करते हुए कहा कि 1009 रन की पारी बीती बात हो गई. मुझे अपने खेल पर और मेहनत करनी होगी.

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