चीन की गंदी चाल! काला हुआ अरुणाचल की इस नदी का पानी

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नई दिल्ली ;

अरुणाचल प्रदेश के पाशीघाट में वर्षों से साफ जल देनी वाली सियांग नदी को अरुणाचल की जीवनरेखा माना जाता है लेकिन हाल फिलहाल इसका रंग काला हो गया है. स्थानीय निवासी इससे परेशान है. नदी के पानी में अब बड़ी मात्रा में मिट्टी, कीचड़ और गंदगी देखने को मिल रही है. नदी का पानी इस्तेमाल करने के योग्य नहीं रह गया. सियांग नदी चीन से (तिब्बत में यारलंग जांगबो) बहती है. असम में आकर यह ब्रह्मपुत्र कहलाती है. नदी का रंग काला पड़ने के पीछे चीन की करतूत होने की आशंका है. टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक,  पूर्वी सियांग जिले के डिप्टी कमिश्नर ताम्यो तातक ने बताया, “इस पानी का किसी भी काम के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्योंकि इसमें सीमेंट जैसी पतली सामग्री है. डेढ़ माह पहले बहुत सी मछलियां मर गईं थी.”

उन्होंने आगे बताया, “पिछले मॉनसून सीजन की बात है जब नदी के पानी का रंग काला पड़ गया था. तब हमने सोचा कि ढेर सारी मिट्टी और कीचड़ के कारण ऐसा हुआ है. बरसात का मौसम भी लंबा रहता है लेकिन पानी अभी भी काला ही है. नवंबर से फरवरी माह में पानी बिल्कुल साफ और स्वच्छ रहता है. मेरे दादा जी ने भी सियांग के पानी के साथ ऐसा होते कभी नहीं देखा, न ही सुना.”

तातक के मुताबिक, “केंद्रीय जल आयोग ने सियांग नदी के पानी के सैंपल ले लिए हैं. पूरी आशंका है कि इसके पीछे चीन की हाथ है. ऐसा लगता है कि चीन में नदी के ऊपर क्षेत्रों में सीमेंट से जुड़ा कुछ काम चल रहा है. गहरी बोरिंग से जुड़ा काम होने की आशंका है. अन्यथा इतनी बड़ी नदी के दो महीनों में काले पड़ने के पीछे और क्या वजह हो सकती है, जो आगे चलकर ब्रह्मपुत्र बन जाती है.”

सियांग नदी को भारत में दिहांग के नाम से भी जाना जाता है जो 230 किमी बहने के बाद लोहित नदी में मिल जाती है. तातक ने बताया कि उन्होंने अरुणाचल सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है.

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