‘पद्मावती’ के विरोध में सियासी जगह तलाशते राजनीतिक दल, 15 राज्यों की 500 सीटों पर है प्रभाव

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नई दिल्ली ;

संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ को लेकर जारी विरोध के चलते कई राज्य फिल्म को प्रदर्शित करने के समर्थन में नहीं है. इन राज्यों की सरकारों को लगता है कि यदि उन्होंने फिल्म को रिलीज होने दिया तो कहीं ना कहीं उन्हें राजपूत समुदाय के वोट से हाथ धोना पड़ सकता है. राजस्थान, गुजरात, एमपी, यूपी जैसे राज्यों में राजपूत समुदाय की अच्छी-खासी संख्या है. गुजरात में चुनाव चल रहे हैं, यूपी में नगर निकाय चुनाव जारी है. आने वाले साल में राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी चुनाव होने है. जिसके चलते राजनीति दल किसी भी तरह का नुकसान नहीं उठाना चाहते है. देशभर की बात करें तो राजपूत समुदाय की कुल जनसंख्या का मात्र 5 प्रतिशत है. देश के 29 में से 15 राज्य ऐसे हैं जिनमें राजपूत विधायक और सासंद है. इन्हीं 15 राज्यों की कुल 500 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जिनपर राजपूत समुदाय का प्रभाव है. इन सीटों पर राजपूत समुदाय का खासा असर देखा जाता है.

ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दलों ने फिल्म को लेकर उपजे विवाद में कोई राजनीतिक जोखिम नहीं उठाया. जहां बीजेपी शासित 7 राज्यों ने फिल्म ‘पद्मावती’ ना दिखाने की बात कही है. वहीं कांग्रेस शासित पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह भी फिल्म को ना रिलीज करने की बात मीडिया को कह चुके है.  देश के 7 प्रमुख राज्यों में राजपूत समुदाय का इतना प्रभाव है कि वहां विधायक सांसद ही नहीं सीएम तक इस समुदाय से रहे है. देश में केवल पश्चिम बंगाल ही ऐसा राज्य है जिसने खुलकर फिल्म पद्मावती का समर्थन किया है.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक संख्या के आधार पर देखे तो उत्तर प्रदेश में राजपूतों की संख्या सबसे ज्यादा है. यहां 1.5 करोड़ की संख्या में राजपूत समुदाय की आबादी है. राजस्थान में राजपूतों की संख्या 65-70 लाख आंकी गई है. वहीं मध्य प्रदेश में राजपूत समुदाय 60-65 लाख की आबादी में रहता है. बिहार की बात करें तो यहां 50-55 लाख की आबादी इस समुदाय की है. चुनावी राज्य गुजरात में राजपूतों की संख्या 40 से 45 लाख तक है. पहाड़ी राज्य उत्तराखंड 35 से 40 लाख राजपूत और हिमाचल में 25 लाख की संख्या में राजपूत रहते है.

चुनावी राज्य गुजरात की बात करें तो यहां 17 से 18 जिले ऐसे हैं जिनमें 10 प्रतिशत वोटर्स राजपूत समुदाय से हैं. राज्य की 20 में से 25 सीटों पर इनका असर है. गुजरात में राजपूत समुदाय से वर्तमान में 18 विधायक हैं. उत्तर प्रदेश की बात करें तो राज्य की 10 में से 11 प्रतिशत की आबादी राजपूत समुदाय की है. वर्तमान में यहां नगर निकाय चुनाव चल रहे है. यूपी से 14 राजपूत सांसद है और वर्तमान में यूपी विधानसभा में 78 विधायक राजपूत हैं.  राजस्थान में राजपूतों की आबादी 8 से 10 प्रतिशत के बीच है. 2018 में विधानसभा यहां चुनाव होने है. वर्तमान में राजस्थान में राजपूत समुदाय से करीब 28 विधायक हैं और तीन सासंद इसी समुदाय से संसद में है. एमपी में राजपूतों की संख्या 7 से 8 प्रतिशत के बीच की है. वर्तमान में राज्य में 3 सासंद इस समुदाय से है. यहां भी 2018 में ही विधानसभा चुनाव होने है. राज्य की करीब 40 से 45 ऐसी सीटें हैं जिनमें राजपूत समुदाय का अच्छी खासी संख्या में है.

हमारे देश में पीएम से लेकर सीएम तक राजपूत रहे है. यूपी के फतेहपुर जिले में मांडा के राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह देश के प्रधानमंंत्री रहे. यूपी के बलिया के रहने वाले चंद्रशेखर भी भारत के प्रधानमंत्री रहे. यह दोनों नेता राजपूत समुदाय से थे. देश की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल भी राजपूत समुदाय से थीं. देश के पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत भी राजपूत समुदाय से ही रहे है. मुख्यमंत्रियों की बात करें तो उत्तर से लेकर मध्य भारत तक में राजपूत सीएम देखने को मिले हैं.

हिमाचल के सीएम वीरभद्र सिंह, उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत और वर्तमान सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे, छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह देश में प्रमुख राजपूत नेताओं में से हैं. जम्मू-कश्मीर के डिप्टी सीएम निर्मल संह और दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया भी राजपूत समुदाय से हैं. एमपी के पूर्व सीएम दिवंगत अर्जुन सिंह और गुजरात के पूर्व सीएम शंकर सिंह वाघेला भी राजपूत समुदाय से रहे है.

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