ऐतिहासिक लम्हा: किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया की धरती पर रखा कदम, पैदल ही पार की सैन्य सीमा

सियोल ;

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के नेताओं ने शुक्रवार (27 अप्रैल) को अंतर कोरियाई सम्मेलन का आयोजन कर इतिहास रच दिया और इसे कोरियाई संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत कहा. किम जोंग उन और मून जे इन के सीमावर्ती गांव पनमुनजोम में मिलने के बाद यह सम्मेलन शुरू हुआ. इस दौरान किम जोंग ने मून से कहा, “आपसे मिलकर खुशी हुई. मैं यहां इस तरह के ऐतिहासिक स्थान पर मिलकर अपनी उत्सुकता नहीं रोक सकता. यह बहुत ही भावुक है कि आप राष्ट्रपति यहां पनमुनजोम में मेरे स्वागत के लिए आए.” इस दौरान किम जोंग ने मून जे इन को उत्तर कोरियाई सीमा की तरफ आने का न्यौता देते हुए सभी को हैरान कर दिया.

दोनों नेताओं के बीच वार्ता किम जोंग के एमडीएल पार करने के लगभग 45 मिनट बाद सुबह 10.15 बजे शुरू हुई. वह 1950-1953 का कोरियाई युद्ध समाप्त होने के बाद ऐसा करने वाले उत्तर कोरिया के पहले नेता बन गए हैं. किम जोंग ने बैठक की शुरुआत में कहा, “मैं यह राष्ट्रपति मून और यहां मौजूद कई पत्रकारों के सामने कहता हूं कि मैं राष्ट्रपति मून के साथ ईमानदारी से भरे दृष्टिकोण के साथ सार्थक बातचीत करूंगा, जिसके अच्छे नतीजे सामने आएंगे.”

मून जे इन ने इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए सहमत होने पर किम जोंग का आभार जताया. मून ने कहा, “जिस समय किम जोंग ने सैन्य सीमा रेखा पार की, पनमुनजोम शांति का प्रतीक बन गया. मैं एक बार फ्रि किम जोंग उन के आज की इस संभावित चर्चा के फैसले के लिए उनके प्रति सम्मान जताता हूं.” कोरियाई देशों के बीच तनाव भरे संबंधों के बीच यह सम्मेलन हो रहा है. उत्तर कोरिया की ओर से नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में देश के ऑनरेरी अध्यक्ष किम योंग नैम, विदेश मंत्री री योंग हो और किम की बहन किम यो जोंग भी हैं. किम यो जोंग उत्तर कोरिया की वर्कर्स पार्टी के प्रोपेगैंडा एंड एजिटेशन डिपार्टमेंट की निदेशक हैं. किम यो जोंग ने दक्षिण कोरिया में शीतकालीन ओलम्पिक खेलों के दौरान सियोल का ऐतिहासिक दौरा भी किया था.

गौरतलब है कि उत्तर कोरिया ने मई 2017 में मून जे इन के दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति बनने के बाद से लगभग दर्जनभर मिसाइलों का परीक्षण किया है, जबकि सितंबर 2017 में अपना छठा और सबसे शक्तिशाली परमाणु परीक्षण भी किया. वर्ष 2000 और 2007 में प्योंगयांग में शिखर सम्मेलन के बाद इस तरह की यह तीसरी बैठक है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एवं किम के बीच बहुप्रतीक्षित मुलाकात से पहले कोरियाई प्रायद्वीप में राजनयिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. बहरहाल इस दौरान उत्तर कोरिया का परमाणु जखीरा दोनों नेताओं के बीच मुख्य एजेंडा है.

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