कारगिल की कहानियां : उधार के हथियारों से लड़ रही थीं कई बटालियन

नई दिल्ली ; 

कारगिल की लड़ाई इस तरह अचानक हुई उस समय भारतीय सेना पूरी तरह तैयार नहीं थी. एक तरफ सेना के पास हथियारों की कमी थी तो दूसरी तरफ बोफोर्स कंपनी पर प्रतिबंध लगा हुआ था. कई बटालियन के पास अपने हथियार नहीं थे.

उन हालात को बयान करते हुए तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल वीपी मलिक ने ‘जी न्यूज’ डिजिटल को बताया, ‘हां हथियारों की काफी शॉर्टेज थी. हमने राष्ट्रीय राइफल्स की कई नई यूनिट बनाई थीं, लेकिन उनके हथियारों के लिए मंजूरी नहीं आई थी, तो उनको दूसरी बटालियन से हथियार इकट्ठे करके हमने दिए थे. तो हमारे पास जरूरत की क्षमता के हिसाब से हथियार नहीं थे. इसके अलावा बोफोर्स तोप के पुर्जे हमारे पास नहीं थे, गोला बारूद कम था. काफी दिक्कतें थी.’

जनरल मलिक ने बताया, ‘बोफोर्स कंपनी पर पाबंदी लगी थी, इसकी वजह से हम उसके पार्ट नहीं मंगा पाते थे. युद्ध के दौरान मैंने प्रधानमंत्री से निवेदन किया कि हमें यह चीजें चाहिए, इसलिए आप बोफोर्स तोप से पाबंदी हटा दीजिए, तो फिर वह पाबंदी उस समय हटा दी गई थी. उसके बाद हम बोफोर्स के पाट्र्स मंगाने के लिए स्वतंत्र हो गए थे.’ उन्होंने बताया, ‘दरअसल, उस समय हमारे एक पत्रकार मित्र ने सवाल किया था कि आप तो हमेशा गोला बारूद की कमी की बात करते रहे हैं और अब तो युद्ध आ गया है, तो ऐसे में आप कैसे लड़ेंगे. तो उसका मैंने जवाब दिया था कि हमारे पास जो भी है हम उससे लड़ेंगे. यह कोई बहादुरी की बात नहीं थी, बल्कि यह एक ऐसी सिचुएशन थी, जिसमें हम हेल्पलेस थे. हमारे पास कोई और चारा ही नहीं था. तो ऐसी सिचुएशन में आर्मी चीफ और क्या करता. मैं नहीं चाहता था कि ऐसे हालात में हमारे जवानों का हौसला किसी भी तौर पर टूटे या उन पर कोई गलत असर पड़े.’

19 साल पहले भारत ने पाकिस्तान को कारगिल युद्ध में धूल चटा दी थी. इस दिन से भारत कारगिल विजय दिवस मनाता आ रहा है. कारगिल विजय दिवस पर बुधवार (26 जुलाई) को सारा देश युद्ध में जान न्यौछावर करने वाले शहीदों को याद कर रहा है. पूर्व सेनाध्यक्ष वीपी मलिक कारगिल युद्ध के समय सेना का नेतृत्व कर रहे थे. उन्होंने इस यु्द्ध के अपने अनुभवों पर एक किताब लिखी- ‘कारगिल एक अभूतपूर्व विजय.’

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