जब इस युवा क्रिकेटर को सचिन ने बुला लिया अपने घर, और गिफ्ट किया बल्ला

मुंबई(अंकुर त्यागी) ; 

क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने एक क्रिकेटर को अपने घर बुलाया और गिफ्ट में एक बल्ला दिया. यह खिलाड़ी कोई खास नहीं बल्कि उत्तरप्रदेश के एक छोटे-से निकला 17 वर्षीय यशस्वी जायसवाल है. अंडर-19 टीम में सिलेक्ट हो चुके यशस्वी अब अर्जुन तेंदुलकर के साथ श्रीलंका खेलने जाएंगे.

दरअसल, उत्तरप्रदेश के भदोही जिले के एक छोटे से गांव का रहने वाला यशस्वी 2 बड़ी बहनों और एक बड़े भाई के बाद घर का सबसे छोटा सदस्य है. बचपन से क्रिकेट को अपने जुनून में रखने वाले यशस्वी के पिता की आमदनी इतनी नहीं थी की वो अपने बेटे के इस शौक पर पैसा खर्च कर सकें. साल 2013 में यशस्वी क्रिकेट खेलने की तमन्ना लिए मुंबई आ गया. यहां आकर सबसे पहले वो एक डेयरी में रहा, लेकिन वहां उसे सिर्फ इस शर्त पर रखा गया कि उसे दुकान में काम भी करना होगा. दिनभर क्रिकेट खेलने वाले यशस्वी के लिए क्रिकेट खेलने के बाद दुकान पर काम करना संभव नहीं था इसलिए वहां से जाना पड़ा.

कई बड़े क्रिकेटर्स की जन्मभूमि रहे आज़ाद मैदान में मौजूद मुस्लिम यूनाइटेड क्लब ने इस शर्त पर यशस्वी को अपने तंबू में रहने की इजाजत दे दी कि उसे मैच में बढ़िया परफॉरमेंस करना होगा. इसके बाद करीब 3 साल के लिए आज़ाद मैदान का यही तंबू यशस्वी का निवास स्थान बन गया. इस दौरान यशस्वी ने बहुत स्ट्रगल किया. बारिश के दिनों में तंबू के अंदर गंदा पानी भर जाता था, रात को मच्छर काटा करते थे. एक छोटे-से तंबू में यशस्वी के साथ 6 और बच्चे भी रहा करते थे.

खास बात यह रही कि जब सचिन को यशस्वी की इस कहानी का पता चला तो उन्होंने मिलने के लिए अपने घर बुलाया. सचिन के साथ यशस्वी की 45 मिनट की एक लंबी बातचीत हुई. यशस्वी ने सचिन से अपने कई सारे खेल से जुड़े पहलुओं पर बात की और खेल में किस स्तर पर जा कर कितना सुधार किया जा सकता है इन सब पर एक टिप्स लिए. सचिन से बात करते वक्त वो इतना खो गए कि एक सेल्फी खिचवाने तक की बात याद नहीं रही. सचिन ने ज़रूर यशस्वी को अपना एक बैट साइन करके याद के तौर पर भेंट किया.

अपने खर्चों के लिए कई बार यशस्वी ने सड़कों पर पानीपुरी (गोलगप्पे) बेचने के काम भी किया है. दशहरे के मेले में कुछ घंटे पानीपुरी बेचने के बदले में यशस्वी को 40 से 50 रुपए की कमाई होती थी. इसके साथ ही इनाम के तौर पर एक प्लेट पानीपुरी भी मिलती थी. क्रिकेट में बढ़िया खेलने पर मिलने वाले 200 या कभी-कभी 300 रुपयों से उनका पूरे हफ्ते का खर्चा निकल जाता था. जहां एक तरफ दूसरे क्रिकेटर्स अपने साथ घर से बनाया हुआ लंच लाया करते थे तो वहीं यशस्वी खुद अपने लिए भोजन तैयार करता था.

इन्ही दिनों में युवा खिलाड़ी यशस्वी जायसवाल को कोच ज्वाला सिंह का साथ मिला. उसके टैलेंट को पहचान कर ज्वाला सिंह ने यशस्वी का पूरा खर्चा उठाने का जिम्मा अपने सिर ले लिया. धीरे-धीरे यशस्वी ए डिवीज़न के बॉलर्स की बहुत बढ़िया धुनाई करने लग गया.

जहां छोटी-सी उम्र में ही बच्चे सोशल मीडिया के चुंगल में फस जाते हैं ऐसे में यशस्वी के पास न तो कोई स्मार्टफ़ोन है और ना ही वो किसी सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं. वो अपने खेल को लेकर बेहद फोकस रहते हैं. उन्होंने पिछले 5 सालों में करीब 49 शतक लगा दिए हैं. यही वजह रही है कि अब उसका सिलेक्शन श्रीलंका जाने वाली अंडर-19 क्रिकेट टीम में हुआ है, जहां यशस्वी के साथ सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर भी खेल रहे होंगे.

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