ट्रेन में सफर करने वालों को अच्छा नहीं लगेगा Railway का यह फैसला

नई दिल्ली ; 

अगर आप भी भारतीय रेलवे के फ्लैक्सी फेयर सिस्टम से परेशान हैं और पिछले दिनों संसदीय समिति की तरफ से आए बयान के बाद आपको कुछ राहत मिलने की उम्मीद बंधी थी तो यह खबर आपको झटका दे सकती है. दरअसल पिछले दिनों संसदीय समिति ने प्रीमियम ट्रेनों में हवाई यात्रा से भी ज्यादा किराया वसूलने को लेकर इंडियन रेलवे की आलोचना की थी. अतिरिक्त किराया रेलवे की तरफ से पिछले दिनों शुरू किए गए फ्लेक्सी फेयर सिस्टम के तहत लिया जा रहा है. संसदीय समिति की तरफ से इस सिस्टम की आलोचना किए जाने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि फ्लेक्सी फेयर सिस्टम वापस लिया जा सकता है.

लेकिन रेलवे फ्लेक्सी फेयर सिस्टम को खत्म करने के मूड में नहीं लग रहा. रेलवे की तरफ से मंगलवार को साफ किया गया कि फ्लेक्सी फेयर सिस्टम को वापस लेने का कोई मूड नहीं है. हालांकि यह उम्मीद की जा रही है कि रेलवे की इस स्कीम में कुछ बदलाव किया जा सकता है. न्यू इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के अनुसार फ्लेक्सी फेयर सिस्टम को 168 प्रीमियम ट्रेनों में शुरू किया गया था. 9 सितंबर 2016 को इस स्कीम को राजधानी, शताब्दी और दुरंतो में शुरू किया गया था.

इस सिस्टम के तहत वित्तीय वर्ष 2016-17 (सितंबर से मार्च), 2017-18 और 2018-19 में अप्रैल से जून तक रेलवे ने क्रमश: 371, 860 और 262 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई की. रेलवे बोर्ड ने दिसंबर 2017 में फ्लेक्सी फेयर का का रिव्यू करने के लिए एक कमेटी का गठन किया. इस कमेटी ने फ्लेक्सी फेयर से यात्रियों और रेलवे रेवेन्यू पर पड़ने वाले असर का अध्ययन किया. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट पेश कर दी लेकिन इसे कुछ बदलावों के लिए वापस भेज दिया गया. हालांकि अभी रेल मंत्री पीयूष गोयल का दोबारा आने वाली रिपोर्ट पर फैसला लेना बाकी है.

यह भी खबर है कि रेलवे प्रीमियम ट्रेनों में यात्रियों को कुछ स्पेशल सर्विस देने पर फैसला कर रहा है. इसके अलावा पिछले एक साल में ट्रेनों के लेट होने को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों के इंजन को जीपीएस से लैस करने की प्लानिंग है. इसके अलावा करीब 6 हजार रेलवे स्टेशनों को भी कैमरों से लैस किया जा रहा है. मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार रेलवे फ्लेक्सी फेयर इसलिए खत्म करने के मूड में नहीं है क्यों उससे उससे रेलवे को अतिरिक्त आमदनी हो रही है.

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