बजट से महंगा होगा भारत में मोबाइल, बढ़ेगी एपल आईफोन और गूगल पिक्सल की कीमत

नई दिल्ली  ;

सरकार द्वारा मोबाइल फोन पर सीमा शुल्क को पांच प्रतिशत बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने से एपल आईफोन और गूगल पिक्सल के दाम तीन से चार प्रतिशत बढ़ जाएंगे. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार (1 फरवरी) को 2018-19 का बजट पेश करते हुए मोबाइल फोन और कुछ अन्य पुर्जों पर सीमा शुल्क में पांच प्रतिशत बढ़ोतरी की घोषणा की. एपल और गूगल से इस पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं ली जा सकी. कई चीनी कंपनियां मसलन शियोमी, लेनोवो, ओप्पो, वीवो तथा वनप्लस पहले ही उल्लेखनीय संख्या में अपने उत्पाद भारत में बना रही हैं. वहीं दूसरी ओर एपल आईफोन एसई को छोड़कर अन्य सभी हैंडसेट का आयात करती है.

काउंटरपॉइंट रिसर्च के सहायक निदेशक तरुण पाठक ने कहा, ‘‘बजट प्रस्ताव से स्थानीय विनिर्माण अभी के 75 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत हो जाएगा. इस घोषणा से एपल और गूगल जैसी अपने उत्पादों का आयात करने वाली कंपनियों पर अधिक प्रभाव पड़ेगा.’’ इंडियन सेल्युलर एसोसिएशन (आईसीए) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज महेंद्रू ने कहा कि सीमा शुल्क में बढ़ोतरी आयात के लिए ताबूत में आखिरी कील है. उन्होंने कहा कि हम ऐसी स्थिति में पहुंच रहे हैं जिसमें आयात लगभग असंभव हो जाएगा. हालांकि, महेंद्रू ने यह भी कहा कि भारत में बिकने वाले ज्यादातर हैंडसेट भारत में बन रहे हैं इसलिए व्यापक रूप से कीमतों पर असर नहीं होगा. एचएमडी ग्लोबल जो भारत में नोकिया फोन बेचती है ने कहा कि शुल्क वृद्धि का असर उस पर न्यूनतम होगा क्योकि नोकिया के मौजूदा पोर्टफोलियो के ज्यादातर फोन भारत में ही बन रहे हैं.

चीनी कंपनी वन प्लस ने कहा कि देश में बिकने वाले सभी स्मार्टफोन का 85 प्रतिशत का उत्पादन अब स्थानीय स्तर पर होता है. यह विनिर्माण क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए नियमों की अगली श्रृंख्ला पेश करने का एक उपयुक्त समय है. वन प्लस इंडिया के महाप्रंबधक विकास अग्रवाल ने कहा, “हम भारतीय बाजार के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं और प्रस्तावित नियमों का स्वागत करते हैं. वर्तमान में, सभी वनप्लस स्मार्टफोन स्थानीय स्तर पर तैयार किए जाते हैं.”

अग्रणी चीनी स्मार्टफोन कंपनी शियोमी ने बजट पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन बताया जाता है कि उसके द्वारा बेचे जाने वाले 95 प्रतिशत स्मार्टफोनों का विनिर्माण देश में होता है इसलिए सीमा शुल्क बढ़ने से उस पर बहुत थोड़ा असर होगा. घरेलू मोबाइल निर्माता कंपनी माइक्रोमैक्स के सह-संस्थापक राजेश अग्रवाल ने कहा, “विनिर्माण के लिए भारत वैश्विक हब के रूप में उभर रहा है. सरकार की ओर से उठाए गए कदम निश्चित रूप से निर्माताओं के बीच आत्मविश्वास बढ़ाएगा और मेरा दृढ़ विश्वास है कि यह आगे व्यापार और मानव संसाधन के अवसरों को भी बनाएगा.”

वहीं दूसरी ओर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने देश में सरकारी परियोजनाओं के तहत दूरसंचार ​बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए 2018-19 में 10,000 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा गुरुवार (1 फरवरी) को की. इसके साथ ही सरकार ग्रामीण इलाकों में पांच लाख वाई फाई हॉटस्पॉट स्थापित करेगी, ताकि लगभग पांच करोड़ ग्रामीण हाईस्पीड वाले इंटरनेट का इस्तेमाल कर पाएं. जेटली ने संसद में अपने बजट भाषण में सरकार की भारतनेट परियोजना के तहत किए गए काम का जिक्र करते हुए कहा यह घोषणा की. उन्होंने कहा, ‘दूरसंचार बुनियादी ढांचा बनाने व उसे मजबूत करने के लिए मैंने 2018-19 में 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है.’

भारतनेट परियोजना का लक्ष्य मार्च 2019 तक 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को हाई स्पीड ब्राडबैंड से जोड़ना है. जेटली ने कहा, ‘भारतनेट कार्यक्रम के पहले चरण के तहत एक लाख ग्राम पंचायतों को हाइस्पीड आप्टिक फाइबर नेटवर्क से जोड़ने का काम पूरा कर लिया गया है. इससे लगभग 2.5 लाख गांवों में ग्रामीणों की ब्राडबैंड तक पहुंच सुनिश्चित हुई है. सरकार पांच लाख वाईफाई हाटस्पाट स्थापित करने का भी प्रस्ताव करती है जिससे पांच करोड़ ग्रामीणों को ब्राडबैंड पहुंच मिलेगी.’

उन्होंने कहा कि दरसंचार विभाग आईआईटी चेन्नई में स्वदेशी 5जी केंद्र स्थापित करने में मदद करेगा ताकि 5जी जैसी उदीयमान प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल व अंगीकरण को प्रोत्साहित किया जा सके. इसके साथ ही वित्त मंत्री ने विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग को 3,073 करोड़ रुपये आवंटन की घोषणा की ताकि देश में मशीन लर्निंग, कृत्रिम समझ, इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी डिजिटल प्रौद्योगिकियों को बढावा दिया जा सके.

जेटली ने डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के लिए आवंटन को 2018 19 में दोगुना कर 3073 करोड़ रुपये करने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि सरकार की डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया व मेक इन इंडिया जैसी पहलों से ज्ञान आधारित व डिजिल समाज बनाने में मदद मिलेगी. कृत्रिम समझ के क्षेत्र में सरकार के प्रयासों को दिशा देने के लिए नीति आयोग एक राष्ट्रीय कार्यक्रम लाएगा.

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