महंगी होने वाली हैं ये चीजें, पेट्रोल-डीजल के भी बढ़ेंगे दाम, इसने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली ;

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है. पिछले एक हफ्ते में रुपया 14 महीने के निचले स्तर पर पहुंच चुका है. एक्सपर्ट्स की मानें तो रुपया का भाव 68 प्रति डॉलर के पार जा सकता है. ऐसे में साफ संकेत हैं कि रुपए की कमजोरी से सरकार के साथ-साथ आम आदमी की जेब पर भी असर पड़ेगा. मुश्किल यह है कि पेट्रोल और डीजल के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण चीजों पर भी असर पड़ सकता है और महंगाई बढ़ सकती है. आइये जानते हैं कि रुपए की कमजोरी से आप पर क्या असर हो सकता है.

रुपए में गिरावट महंगाई बढ़ने का संकेत है. क्योंकि, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से खाद्य पदार्थों से लेकर अन्य चीजों के दाम बढ़ सकते हैं. इसे ऐसे समझा जाए कि भारत अपनी जरूरत के हिसाब से 80 फीसदी पेट्रोलियम प्रोडक्ट आयात करता है. रुपए में गिरावट से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का आयाता महंगा हो सकता है. तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की दाम बढ़ा सकती है. डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई बढ़ जाएगी, जिसके चलते महंगाई बढ़ने के आसार हैं.

डॉलर के मूल्य में एक रुपए की बढ़ोतरी से तेल कंपनियों पर करीब 8,000 करोड़ रुपए (एक अनुमान के तौर पर) का बोझ बढ़ता है. उन्हें पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ता है. पेट्रोलियम उत्पाद की कीमतों में 10 फीसदी बढ़ोतरी से महंगाई करीब 0.8 फीसदी बढ़ जाती है. इसका सीधा असर आपने खाने-पीने और परिवहन लागत पर पड़ता है. ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से खाने-पीने की चीजें के दाम में भी इजाफा हो सकता है.

भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों और दालों का भी आयात करता है. रुपए में कमजोरी से परिवाहन लागत बढ़ेगी और इसका सीधा असर घरेलू बाजार में खाद्य तेलों और दालों की कीमतें पर पड़ता है. कीमतों में बढ़ा इजाफा देखने को मिल सकता है.

देश में कई जरूरी दवाएं बाहर से आती हैं. डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट की वजह से दवाओं के आयात के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है, जिससे वह महंगी हो जाती हैं. घरेलू बाजार में पहले ही दवाओं की कालाबाजारी की वजह से महंगी दवाएं मिलती हैं. ऐसे में रुपए की कमजोरी से दोहरी मार पड़ सकती है.

विदेश में पढ़ने वाले बच्चों पर खर्च भी डॉलर में तय होता है. रुपए की गिरावट के साथ-साथ यह खर्च भी बढ़ जाता है. भारतीय छात्रों के लिए यूएस, ब्रिटेन, कनाडा, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया जैसी देशों में पढ़ाई के लिहाज से सबसे ज्यादा ऑप्शन हैं. विदेश की यूनिवर्सिटीज में ज्यादा ट्यूशन फीस होती है और अब रुपए की कमजोरी से इन देशों की करेंसी के मुकाबले ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है. पढ़ाई का खर्चा बढ़ जाता है.

रुपए की कमजोरी से विदेश यात्रा भी महंगी हो जाती है. दरअसल, रुपए के मुकाबले किसी भी देश की करेंसी एक्सचेंज में आपको ज्यादा रकम चुकानी पड़ती है. इसके अलावा अन्य चीजों के लिए भी भुगतान ज्यादा करना पड़ता है. हालांकि, फ्लाइट और होटल बुकिंग रुपए में हो सकती है. लेकिन विदेश में होने वाले खर्च पर आपको अतिरिक्त पैसे चुकाने पड़ते हैं. ऐसे में अगर आप भी विदेश यात्रा की तैयारी कर रहे हैं तो निश्चित तौर पर रुपए की गिरावट चिंता की बात है.

रुपए की कमजोरी से देश के खजाने पर भी असर पड़ता है. क्योंकि, रुपए की कमजोरी से इंपोर्ट महंगा होता है. सरकार को इंपोर्ट पर ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं. वहीं, डॉलर में कर्ज लेने वाली कंपनियों पर भी नकारात्मक असर होता है. ब्याज का बोझ अधिक होता है और कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ता है.

रुपए में कमजोरी से जहां इतनी चीजें महंगी हो जाती हैं. वहीं, कुछ सेक्टर्स ऐसे हैं जिन्हें इससे फायदा मिलता है. सबसे पहले तो देश के एक्सपोर्ट्स को इसका फायदा होता है. वहीं, आईटी, फार्मा, टेक्सटाइल, डायमंड, जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर को इसका फायदा मिलता है. देश से निर्यात होने वाले उत्पाद जैसे चाय, कॉफी, चावल, गेहूं, कपास, चीनी और मसाले से जुड़ी कंपनियो या एक्सपोर्ट्स को फायदा मिलता है. कृषि और इससे जुड़ उत्पाद के निर्यातकों को रुपए में गिरावट का लाभ होता है.

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