व्यापम अब बन चूका है ‘द ग्रेट भर्ती घोटाला’

स्नेहल पंचोली
संपादक

मध्यप्रदेश में इन दिनों भाजपा सरकार को व्यापम भर्ती घोटाले ने बहुत परेशान कर रखा है. वहीँ दूसरी और इस घोटाले की आंच मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह तक पहुंच चुकी है. इसे मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा घोटाला माना जा रहा है.

इस घोटाले की जांच हाइकोर्ट के निर्देश पर एसटीएफ कर रही है.मेडिकल कॉलेज में दाखिले की यह गड़बड़ी पकड़ी गयी, तो दूसरी सरकारी नौकरियों का फर्जीवाड़ा भी सामने आने लगा. व्यापम घोटाले में 55 केस दर्ज किये गये हैं, जिनमें 2,530 लोग आरोपित हैं, इनमें से 1,980 गिरफ्तार हो चुके हैं और 550 फरार हैं. इतने सारे केसों की सुनवाई के लिए प्रदेश में बीस से ज्यादा कोर्ट बनाये गये हैं. इस केस की व्यापकता का अंदाजा इस बात से भी लगता है कि लंबे समय से चल रहे इस घोटाले के कुल 42 आरोपित मौत के मुंह में जा चुके हैं. यह बताया जाता है कि मध्यप्रदेश के इस मामले में फंसे पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के साथ ही इस घोटाले में एक पूरा नेटवर्क काम कर रहा था. मंत्री शर्मा का करीबी सुधीर शर्मा भी इस घोटाले में शामिल है. खनिज मंत्री रहते हुए लक्ष्मीकांत शर्मा ने सुधीर शर्मा को ओएसडी बनाया था.खबरों के मुताबिक मेडिकल कॉलेजों में 514 मामले शक के घेरे में हैं. 1000 फर्जी भर्ती की बात तो खुद शिवराजसिंह चौहान विधानसभा में स्वीकार कर चुके हैं. इसके अलावा 2008 से 2010 के बीच सरकारी नौकरियों से जुड़ी 10 परीक्षाओं में धांधली के आरोप हैं.

मध्यप्रदेश सरकार के राज में पनपे इस घोटाले ने सरकारी खजाने को तो बहुत नुकसान नहीं पहुंचाया, मगर प्रदेश के कई प्रतिभाशाली लोगो को बेमौत मार डाला . सरकार की नाक के नीचे सालों से चल रहा यह घोटाला साबित करता है कि जब बाड़ ही फसल को खा रही थी, तब प्रदेश में सरकारी तंत्र जान-बूझ कर इससे आंखें मूंदे हुए था.

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