सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई से पूछा, बताएं NEET परीक्षा में कैसे होंगे एक समान प्रश्नपत्र

नई दिल्ली ;

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सीबीएसई से पूछा कि बताएं कि अंग्रेजी, हिंदी के साथ ही स्थानीय भाषाओं में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के प्रश्न पत्र एक समान कैसे होंगे. न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायाधीशों की पीठ ने अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल मनिंदर सिंह से कहा कि इस संबंध में हलफनामा दायर करें और मामले की अगली सुनवाई की तारीख दस अक्तूबर तय की. वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के लिए पेश हुए. सिंह ने पीठ से कहा कि नीट 2017 की परीक्षा में स्थानीय भाषाओं में प्रश्न पत्र अंग्रेजी या हिंदी के अनुवाद से मिलते-जुलते नहीं थे लेकिन वे उतने ही कठिन थे. याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुई वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि हिंदी और अंग्रेजी की तरह स्थानीय भाषा में प्रश्नपत्र एक समान नहीं थे,

सुप्रीम कोर्ट ने पहले नीट 2017 की परीक्षा को अमान्य घोषित करने से इनकार करते हुए कहा था कि इससे छह लाख से ज्यादा उम्मीदवार प्रभावित होंगे जो मेडिकल एवं डेंटल पाठ्यक्रमों में नामांकन लेने के लिए प्रवेश परीक्षा पास की है. इसने कहा था कि नीट के परिणाम को रोकना काफी कठिन है क्योंकि 11 लाख 35 हजार उम्मीदवारों में से करीब छह लाख 11 हजार उम्मीदवारों ने इसे पास किया और इसके बाद काउंसिलिंग एवं नामांकन प्रक्रिया जारी है. नीट परीक्षा 2017 हिंदी और अंग्रेजी के अलावा आठ स्थानीय भाषाओं में आयोजित की गई थी.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीएसई को इस साल नीट की परीक्षाओं में शामिल हुए सभी उम्मीदवारों को दिए गए अंक संशोधित करने और उत्तर कुंजी में दिए गए 180 आब्जेक्टिव किस्म के प्रश्नों में से एक सवाल के गलत जवाब को देखते हुए उसके मुताबिक मेरिट या रैंक तय करने का निर्देश दिया. न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति अशोक कुमार की खंडपीठ ने सौमित्र गिगोडिया द्वारा दायर रिट याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया. गगोडिया ने स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए इस राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में 720 अंकों में से 665 अंक प्राप्त किए थे और अखिल भारतीय स्तर पर 137 रैंक हासिल की थी.

याचिकाकर्ता ने इस दलील के साथ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया कि उसे यह देखकर निराशा हुई कि टेस्ट बुकलेट वाई की प्रश्न संख्या 172 का आधिकारिक उत्तर गलत था जिसके बाद उन्होंने 1000 रुपये के भुगतान पर उस ओएमआर ग्रेडिंग के खिलाफ एक प्रतिवेदन दिया. सीबीएसई से कोई जवाब नहीं मिलने पर याचिकाकर्ता ने एक आरटीआई आवेदन दाखिल किया जोकि लंबित रहा जिसके बाद उन्होंने यह याचिका दायर कर इस मामले में प्रतिवादी को निर्णय करने के लिए निर्देश देने और प्रश्न संख्या 172 के लिए उन्हें 05 अंक दिए जाने की गुहार लगाई.

यह याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए इस अदालत ने हालांकि कहा, हम पाते हैं कि टेस्ट बुकलेट कोड वाई में प्रश्न संख्या 172 का सही जवाब किसी भी उम्मीदवार द्वारा नहीं दिया जा सका. इसलिए हमारा विचार है कि प्रशासन के व्यापक हित में यह लाभ न केवल याचिकाकर्ता को बल्कि सभी उम्मीदवारों को मिलना चाहिए. अदालत ने कहा, यह याचिकाकर्ता 05 अंक पाने का हकदार है. हम सीबीएसई को प्रश्न संख्या 172 और अन्य बुकलेट्स में दिए गए प्रश्नों के लिए उसी तरह से सभी उम्मीदवारों को उचित अंक देने और का निर्देश देते हैं. भले ही याचिकाकर्ता ने एक प्रमुख उत्तर को चुनौती देने के लिए निर्धारित शुल्क के रिफंड का दावा नहीं किया है, हम पाते हैं कि याचिकाकर्ता द्वारा दी गई चुनौती सही है, इसलिए हमारा विचार है कि याचिकाकर्ता 1000 रुपये का रिफंड पाने का हकदार है. सीबीएसई इस याचिकाकर्ता को जल्द से जल्द 1000 रुपये रिफंड करे.

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