हिमाचल चुनाव से है PM नरेंद्र मोदी का खास नाता, यहीं दिया था मनमोहन सिंह को नया नाम

नई दिल्ली ;

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उस वक्त से नाता है जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे. या यूं कहें कि केंद्र की राजनीति में आने के लिए पीएम मोदी ने अपनी दावेदारी साबित करने के लिए हिमाचल चुनाव को ही चुना था. साल 2012 की बात है, दिसंबर का महीना था, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में एक साथ चुनाव प्रक्रिया चल रही थी. गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने राज्य में अपनी अगुवाई में जीत की हैट्रिक लगाने की चुनौती थी. इसके साथ ही वे अपनी ख्याति गुजरात के बाहर भी साबित करने की कोशिश में जुटे थे. बीजेपी के कई नेता नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की मांग कर चुके थे. खुद पीएम नरेंद्र मोदी केंद्र की राजनीति में आने के सवालों पर मौन स्वीकृति दे चुके थे.

ऐसे हालात में नरेंद्र मोदी गुजरात के बाहर ऐसे मंच की तलाश में थे, जहां से वह पूरे देश की जनता तक अपनी आवाज को पहुंचा सकें. ताकि वह ये साबित कर सकें कि वह केवल गुजरात ही नहीं, पूरे देश को संबोधित करने के लायक हैं. नरेंद्र मोदी ने इसके लिए हिमाचल प्रदेश चुनाव को चुना था. उन्होंने गुजरात में चुनाव होने के बावजूद हिमाचल में करीब चार रैलियां की थीं. 11 दिसंबर 2012 की रैली में तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी ने पहली बार गुजरात के बाहर दिए गए भाषण में तत्कालीन केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला था.

इस रैली में पीएम नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह को ‘मौन’ मोहन सिंह कहकर संबोधित किया था. इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर भी खुलकर हमले किए थे. गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी रैली में कहा था, ‘कल मौन मोहन सिंह हिमाचल प्रदेश आए थे और आज अखबारों में सबसे बड़ी खबर यह है कि ‘मौन’ मोहन सिंह ने हिमाचल प्रदेश में अपनी चुप्पी तोड़ी.’ उन्होंने कहा था, ‘यह अनुमान लगाना असंभव है कि वह (मनमोहन सिंह) देश के हालात के बारे में क्या सोचते हैं.’ इसके साथ तत्कालीन सीएम मोदी ने कहा था, ‘महंगाई और गरीबी से देश की जनता बेहाल है, लेकिन मैडम सोनिया को कोई रास्ता नहीं मिल रहा है.’

तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था, ‘कुछ दिन पहले सोनिया जी मंडी आई थीं. प्रधानमंत्री भी आये. मुझे खुशी और संतोष होता अगर प्रधानमंत्री और सोनिया जी गरीब जनता के बारे में अपनी चिंताएं जताते. महंगाई और गरीबी के मुद्दे पर उन्हें कम से कम एक बार बोलना चाहिए. मोदी ने कहा, क्या मैं आप से एक सवाल पूछ सकता हूं? क्या इन दोनों ने महंगाई पर बात की है. यह एक बड़ा राष्ट्रीय विषय है. क्या इस पर बोलने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की नहीं है.’

तत्कालीन गुजरात के सीएम मोदी का हिमाचल प्रदेश में इस दमदार भाषण के बाद राजनीति के जानकारों के बीच दो तरह की चर्चा होने लगी थी. कुछ लोग यह कह रहे थे कि नरेंद्र मोदी को अपने गृह राज्य गुजरात के विधानसभा चुनाव पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि इस रैली से मोदी ने जता दिया है कि वह गुजरात जीतने वाले हैं और वह केंद्र की राजनीति में आने को इच्छुक हैं. हालांकि 2012 के हिमाचल प्रदेश चुनाव में बीजेपी हार गई थी, लेकिन बतौर सीएम नरेंद्र मोदी की रैली में जुटे भीड़ से संकेत मिल गए थे कि उनकी प्रसिद्धि गुजरात के बाहर भी काफी है.

अब पांच साल बाद एक बार फिर हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है, लेकिन इस बार नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री के रूप में चुनावी सभा को संबोधित करेंगे. इस बार उनके सामने चुनौती है कि वह इस पहाड़ी राज्य में कांग्रेस को परास्त कर बीजेपी की सरकार बनवाएं.

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