हिमालय की गोद में बसा देश जहां धार्मिक नेता न चुनाव लड़ सकते हैं और न वोट दे सकते हैं

नई दिल्ली ; 

हिमालय की गोद में बसा देश भूटान तीसरे आम चुनाव के लिए तैयार है. इस महीने होने वाले चुनावों में चार कोणीय मुकाबला है. करीब एक दशक पहले भूटान के चौथे राजा जिग्मे सिग्ये वांगचुक ने यहां लोकतंत्र की घोषणा की थी. जहां एक तरफ दुनिया भर में प्रदर्शनकारी लोकतंत्र की मांग के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं, वही भूटान एक ऐसा देश है जहां लोग लोकतंत्र को लेकर बहुत उत्साहित नहीं हैं. यहां बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो वापस राजशाही चाहते हैं. लोगों का कहना है कि उनकी राजशाही उन्हें जोड़ती है, जबकि लोकतंत्र चुनाव के नाम पर आपस में बांटता है. लोग कहते हैं कि वो तो सिर्फ इसलिए वोट दे रहे हैं क्योंकि ऐसा करने के लिए राजा ने कहा है.

भूटान के चुनाव की एक विशेषता ये है कि दुनिया के कई देशों के विपरीत यहां निर्वाचित सरकार चुनाव से पहले चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली एक अंतरिम सरकार को सभी शक्तियां सौंप देती हैं. सभी उम्मीदवारों को स्नातक होना चाहिए. यहां की एक और खासियत है. राजनीति और धर्म के गठजोड़ को रोकने के लिए यहां नियम है कि कोई भी धार्मिक नेता चाहे वो भिक्षु हो, नन या पुजारी, वो न तो चुनाव लड़ सकते हैं और न ही वोट दे सकते हैं.

गठबंधन सरकार की आशंका को दूर करने के लिए यहां चुनाव दो राउंड में होते हैं. पहले राउंड में दो सर्वाधिक लोकप्रिय पार्टी को चुना जाता है और उसके बाद दूसरे राउंड में उन दोनों में एक को चुना जाता है. इस साल ये चुनाव 15 सितंबर और 18 अक्टूबर को होंगे.

ये बात एकदम गलत भी नहीं है. पिछले चुनावों में दो दलों के बीच सीधा मुकाबला होने के बाद इस बार चुनाव के मैदान में दो नई पार्टिया भी हैं. ये नई पार्टियां पुरानी पार्टियों की नीतियों का विरोध कर रही हैं. ऐसे में राजनीतिक माहौल में कटुता फैलने की आशंका जताई जा रही है. चुनाव में आत्मनिर्भरता, सुशासन और भ्रष्टाचार का अंत जैसे मुद्दे ही प्रभावी हैं.

ज्यादातर युवा मतदाताओं का कहना है कि उनकी सरकार से सबसे बड़ी मांग रोजगार की है. इस समय भूटान की आबादी आठ लाख है. यहां साक्षरता की दर काफी अच्छी है और 95 से 100 प्रतिशत बच्चों का स्कूल में दाखिला होता है. इसके बावजूद पढ़ेलिखे लोगों के लिए रोजगार के अवसर मांग के अनुरूप नहीं हैं. इसके अलावा एक मुद्दा आनलाइन मीडिया के ग्रोथ से जुड़ा है. भूटान में करीब चार लाख फेसबुक एकाउंट हैं, जबकि पंजीकृत मतदाता केवल 4.32 लाख हैं. सत्ताधारी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के प्रवक्ता ताशी दोरजी ने एक समाचार पत्र को बताया, ‘सभी राजनीतिक दल फेक न्यूज की शिकार हैं.’ कुछ दिन पहले भूटान में अफवाह फैली की सरकार स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण करने जा रही है. जबकि भूटान के संविधान के मुताबिक वहां सभी को ये सेवाएं निशुल्क मिलनी चाहिएं. उन्होंने बताया, ‘लोगों को ये भरोसा दिलाने में कई महीने लग गए कि ऐसी कोई योजना नहीं है.’

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